अन्याय और अत्याचार से मुक्ति का महापर्व है श्रीकृष्ण जन्माष्टमी!!

मथुरा जनपद में हर्षोल्लास से मनाया गया श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का महापर्व समूचे ब्रज मंडल में कुंज गलियों से लेकर चौराहे तिराहों और चौपालों से लेकर मंदिरों को भव्यता से सजाया गया था कान्हा के जन्मदिन को सड़कें गुलज़ार थी दर्शनार्थियों की चहुँओर भीड़ थी यूँ तो हर वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का महापर्व अति उत्साह के साथ ब्रजवासियों द्वारा मनाया जाता है लेकिन श्री कृष्ण जन्माष्टमी का महापर्व है.

2017 से योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री के बनने के बाद से जिस तरीक़े से प्रदेश सरकार द्वारा उत्तर-प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा जगह जगह श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव से जुड़ी लीलाओं का मंचन ब्रिज की जो प्रथाएँ लुप्त तो चुकी हैं उनका मंचन ब्रजवासियों को दर्शनार्थियों को प्रतिवर्ष कराया जा रहा है उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मथुरा आने की सूचना जैसे ही ब्रजवासियों को मिलती है ब्रजवासी उस दिन मुख्यमंत्री को अपनी आँखों से बिना निहारे नहीं छोड़ते चाहे वह हैलीपैड से लेकर सड़क मार्ग से जो आवागमन हो एवं मंदिर प्रांगण कहीं न कहीं ब्रजवासी मुख्यमंत्री की एक झलक पाने के लिए पहुँच ही जाते हैं सबसे बड़ी बात मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहाँ भी जनता को देखते हैं तुरंत हँसकर हाथ हिलाकर उनका अभिवादन करते हैं जन्माष्टमी की ख़ुशी से तो गदगद रहते ही हैं मुख्यमंत्री द्वारा जो अभिवादन किया जाता है वो ब्रजवासियों को प्रफुल्लित कर देता है.

गीता में श्री कृष्ण ने यह संदेश दिया था कि अत्याचारी और अन्यायी कितना भी बड़ा और सागा क्यों न हो उसे समाप्त करने में ही समाज और राष्ट्र की भलाई है 16 अगस्त को योगेश्वर श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया. योगेश्वर श्रीकृष्ण ने महाभारत में द्रौपदी की इज़्ज़त बचायी थी उसी प्रकार उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लेकर गाँव एवं शहरों में आततायी जो अपने कुकर्मों से बाज़ नहीं आ रहे थे चेन छीनने मारपीट छेड़-छाड़ वाद विवादों से बहन बेटियों को परेशान करते थे उनका इलाज उत्तर प्रदेश में पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने शुरू किया जिससे आज हमारे प्रदेश की हमारे शहर की बहन बेटियां सुरक्षित हैं और अब उन्हें रात में भी भय नहीं लगता सड़क पर निकलने में आज हमारी पावन पवित्र धरा अन्याय और अत्याचारियों से मुक्त हो चुकी है जिसका सीधा सीधा उदाहरण है अतीक अहमद अशरफ़ और मुख़्तार अंसारी का अंत अब हमने ऐसे वातावरण में जन्माष्टमी मनाई है जब समाज एकजुट होकर इकट्ठा होकर के हर्षोल्लास के साथ कहीं से कहीं भी जाकर जन्माष्टमी मना कर आया है ये ऐसे में श्रीकृष्ण की स्थिति को आदर्श आज ज़्यादा प्रासंगिक हो रहे हैं उन्होंने अन्यायों के सामने ना तो ख़ुद घुटने टेके और न दूसरों को टेकने दिए समाज में एकता बराबरी प्रेम मोहब्बत और भाईचारे की भावना स्थापित करने में श्री कृष्णा की अहम भूमिका को आजभी संपूर्ण संसार स्वीकार करता है.

उनकी शिक्षा का ये महत्वपूर्ण और सबसे बड़ा कारक है कि समाज को दुष्ट और राक्षसी प्रवृति के लोगों से मुक्त किया जाए यदि हमारा एक अंक विकृत हो गया है तो उसे उखाड़ फेंकने में देरी नहीं की जाए श्री कृष्ण के इन आदर्शों को आत्मसात कर हमें समाज और देश से अन्याय अत्याचार दुराचार को समाप्त करने का संकल्प लेना ही होगा तभी बराबरी और सामाजिक सद्भावना का संदेश जन जन में प्रभावित होगा योगेश्वर श्रीकृष्ण का पूरा जीवन हमारे लिए प्रेरणा का स्त्रोत हैं उनके जीवन की हर 1 घटना एक महत्वपूर्ण संदेश देती है चाहे बचपन की रासलीला हो या गीता का ज्ञान या फिर महाभारत का युद्ध भगवान श्रीकृष्ण के जीवन का हर एक पल मानव जाति के लिए शिक्षा है यह त्योहार श्रीकृष्ण के मानव कल्याण के लिए किए गए कार्यों और आदर्शों को समर्पित है.

भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण का जन्म ने देश विदेश में पारंपरिक हर्षोल्लास धूमधाम से मनाया जाता है धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक़ योगेश्वर श्रीकृष्ण ने भाद्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अवतार लिया था इस कारण इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाने लगा इस त्योहार को भारत में पूरी आस्था श्रद्धा विश्वास के साथ मनाते हैं इसलिए इस दिन मथुरा में काफ़ी हर्षोल्लास से जन्माष्टमी मनाई जाती है इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण के मंदिरों को सजाया जाता है और झांकियों के साथ रास लीला का आयोजन भी किया जाता है यूँ तो मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर भगवान के जन्मोत्सव के विभिन्न कार्यक्रम शनिवार से ही शुरू हो जाते हैं और गुरुवार तक चलते हैं श्री कृष्ण जन्मभूमि पर देश विदेश से लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है .

श्री कृष्णा के भक्त पूरे दिन व्रत रखकर रात्रि 12 बजे मंदिरों में अभिषेक होने के पश्चात पंचामृत ग्रहण कर व्रत खुलते हैं कृष्ण जन्मभूमि के अलावा ठाकुर द्वारकाधीश, श्री बांकेबिहारी ,राधारमण जी राधा बल्लभ भी मंदिरों में इसका भव्य आयोजन होता है सनातन धर्म को मानने वाले लोग इस दिन श्रद्धा एवं प्रेम से व्रत रखते घर में साफ़ सफ़ाई करके धूप दीप से सजाते हैं गाँव में लोग कुछ दिन पहले से ही पकवान बनाने प्रारंभ कर देते हैं मंदिरों को सजाया जाता है मंदिर में सारा दिन भजन कीर्तन होता रहता है इस दौरान कुछ लोग भक्तों के लिए प्रसाद वितरण भी करते हैं भिन्न भिन्न प्रकार की झांकियां दिखाई जाती अर्धरात्रि पर चंद्रमा के दर्शन करके लोग अपना व्रत पूर्ण करते हैं.

रिपोर्ट:- आकाश चतुर्वेदी बैंकर
सी ई ओ / एडिटर इन चीफ़ समाचार सुपरफास्ट न्यूज

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