एमिटी अग्निकांड के बाद ‘समाचार सुपरफास्ट’ की मुहिम, CM योगी से बेसमेंट की कक्षाएं तत्काल बंद कराने की मांग*
लखनऊ, 28 मई 2026: एमिटी यूनिवर्सिटी के बेसमेंट में हुए भीषण अग्निकांड के बाद प्रदेश के शिक्षण संस्थानों में बेसमेंट के इस्तेमाल पर सवाल खड़े हो गए हैं। समाचार सुपरफास्ट के सी.ई.ओ एवं एडिटर इन चीफ आकाश चतुर्वेदी बैंकर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों के बेसमेंट में संचालित कक्षाओं, लाइब्रेरी पर तत्काल कार्यवाही की मांग की है।
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में क्या है:
पत्र की प्रतिलिपि प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा, निदेशक अग्निशमन विभाग, सभी जिलों के जिला मजिस्ट्रेट, AICTE, UGC और स्थानीय विकास प्राधिकरण को भी भेजी गई है। पत्र में कहा गया है कि हाल ही में एमिटी यूनिवर्सिटी के बेसमेंट में बनी लाइब्रेरी एवं अन्य विभाग आग की चपेट में आकर पूरी तरह नष्ट हो गए। यह घटना “अत्यंत चिंताजनक एवं भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी” है।
आकाश चतुर्वेदी ने पत्र में लिखा कि आज भी अनेक विश्वविद्यालय, कॉलेज एवं कोचिंग संस्थान बेसमेंट में कक्षाएं, लाइब्रेरी , कम्प्यूटर लैब तथा अन्य शैक्षणिक गतिविधियां संचालित कर रहे हैं, जहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी अध्ययन करते हैं। आग जैसी आपात स्थिति में बेसमेंट से सुरक्षित निकासी अत्यंत कठिन हो जाती है, जिससे बड़ी जनहानि की आशंका बनी रहती है।
दिल्ली के हादसों का भी जिक्र:
पत्र में कहा गया है कि दिल्ली सहित देश के विभिन्न राज्यों में पूर्व में भी बेसमेंट से संबंधित कई हादसे हो चुके हैं। इसके बावजूद संबंधित नियमों का पालन नहीं कराया जा रहा है, जो अत्यंत गंभीर विषय है।
मुख्यमंत्री से 5 सूत्रीय मांग:
- तत्काल जांच: बेसमेंट में संचालित सभी कक्षाओं, लाइब्रेरी एवं शैक्षणिक गतिविधियों की जांच कराई जाए।
- बिना NOC वाले संस्थान सील: जिन संस्थानों के पास वैध अग्नि सुरक्षा एवं भवन अनुमति नहीं है, उन्हें तुरंत बंद कराया जाए।
- अधिकारियों पर कार्रवाई: बेसमेंट में क्लासरूम अथवा लाइब्रेरी संचालन की अनुमति देने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कठोर कार्यवाही हो।
- विशेष फायर ऑडिट: सभी शिक्षण संस्थानों में अग्नि सुरक्षा मानकों का विशेष ऑडिट कराया जाए।
- सख्त SOP जारी हो: विद्यार्थियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
नियमों की उड़ रही धज्जियां:
नेशनल बिल्डिंग कोड 2016 और यूपी अग्नि निवारण एवं अग्नि सुरक्षा अधिनियम के अनुसार बेसमेंट का उपयोग केवल पार्किंग, स्टोरेज, DG सेट, HVAC या सर्विसेज के लिए किया जा सकता है। शैक्षणिक गतिविधि के लिए बेसमेंट का प्रयोग पूर्णतः प्रतिबंधित है। फिर भी कई संस्थान नियमों को ताक पर रखकर बेसमेंट में कक्षाएं चला रहे हैं।
“सामूहिक जिम्मेदारी है छात्रों की सुरक्षा”:
पत्र के अंत में आकाश चतुर्वेदी ने लिखा, “विद्यार्थियों की सुरक्षा हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। समय रहते उचित कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है ताकि भविष्य में किसी भी मासूम की जान जोखिम में न पड़े।”
शासन से जल्द कार्रवाई की उम्मीद:
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री कार्यालय ने पत्र का संज्ञान लिया है। उच्च शिक्षा विभाग और अग्निशमन विभाग को संयुक्त सर्वे के निर्देश दिए जा सकते हैं। सभी जिलाधिकारियों को भी अपने जनपद में बेसमेंट में चल रही कोचिंग-क्लासेस की सूची 15 दिन में तैयार करने को कहा जा सकता है।
बॉक्स: बेसमेंट क्यों है खतरनाक
1. एक ही रास्ता: 90% बेसमेंट में आपातकालीन निकास नहीं, सिर्फ एक संकरी सीढ़ी।
2. धुएं का जाल: आग में जहरीला धुआं भर जाता है। 2-3 मिनट में दम घुट सकता है।
3. दमकल नहीं पहुंचती: संकरे रैंप के कारण फायर टेंडर अंदर नहीं जा पाते।
4. करंट का खतरा: जलभराव और शॉर्ट सर्किट से करंट फैलने का जोखिम।
भवदीय
आकाश चतुर्वेदी बैंकर
सी.ई.ओ & एडिटर इन चीफ
समाचार सुपरफास्ट
(उत्तर-प्रदेश/उत्तराखंड)
