16 मई को बनेगा दुर्लभ संयोग: वट सावित्री, शनि जयंती और शनिश्चरी अमावस्या एक साथ

16 मई को बनेगा दुर्लभ संयोग: वट सावित्री, शनि जयंती और शनिश्चरी अमावस्या एक साथ
शनि पूजा और दान के लिए अत्यंत शुभ, जानें किन राशियों को मिलेगा विशेष लाभ

रिपोर्ट: आकाश चतुर्वेदी बैंकर
सी.ई.ओ & एडिटर इन चीफ
समाचार सुपरफास्ट
उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड

लखनऊ/देहरादून: साल 2026 में 16 मई का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। इस दिन वट सावित्री व्रत, शनि जयंती और शनिश्चरी अमावस्या का दुर्लभ संयोग बन रहा है। शनिवार को पड़ने वाली दर्श अमावस्या तिथि के साथ एक साथ कई शुभ योगों का निर्माण हो रहा है, जिसे ज्योतिषाचार्य बेहद प्रभावशाली और दुर्लभ बता रहे हैं।

ज्योतिष गणना के अनुसार, इतने बड़े संयोग का बनना कम ही देखने को मिलता है। यही कारण है कि 16 मई का दिन पूजा-पाठ, दान-पुण्य और विशेष रूप से शनि देव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है। जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा का प्रभाव चल रहा है, उनके लिए यह दिन कष्टों से मुक्ति और राहत पाने का अवसर हो सकता है।

किन राशियों के लिए रहेगा सबसे शुभ
ज्योतिषियों के अनुसार, इस संयोग का लाभ कुछ राशियों को विशेष रूप से मिलेगा:

मेष: धैर्य और समझदारी बढ़ेगी। दांपत्य जीवन की छोटी-मोटी तकरार खत्म हो सकती है। रिश्तों में मिठास बढ़ेगी और जल्दबाजी में लिए गए फैसलों से बचने की सीख मिलेगी।

वृषभ: आर्थिक स्थिरता और पारिवारिक सुख मिलेगा। पति-पत्नी के बीच विश्वास मजबूत होगा। लंबे समय से अटके काम पूरे होने के संकेत हैं।

कर्क: मानसिक शांति मिलेगी और कंफ्यूजन दूर होगा। रिश्तों में स्पष्टता आएगी और दांपत्य जीवन में समझ बढ़ेगी।

सिंह: अहंकार कम होगा और रिश्ते बेहतर बनेंगे। दांपत्य जीवन में संतुलन आएगा और मान-सम्मान में वृद्धि होगी।

वृश्चिक: नकारात्मक विचार कम होंगे और रिश्ते मजबूत होंगे। जीवन में धीरे-धीरे स्थिरता आएगी।

धनु: सकारात्मक सोच बढ़ेगी और भाग्य का साथ मिलेगा। दांपत्य जीवन में खुशियां बढ़ेंगी और भविष्य को लेकर आत्मविश्वास मजबूत होगा।

कुंभ: जीवन में स्थिरता और राहत मिलेगी। रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं और मानसिक तनाव कम होगा।

क्यों है यह दिन खास
ज्योतिषियों का कहना है कि वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य का प्रतीक है, वहीं शनि जयंती और शनिश्चरी अमावस्या का संयोग शनि दोषों को कम करने का बड़ा अवसर देता है। शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या को शनिश्चरी अमावस्या कहते हैं, जो शनि पूजा, दान और उपायों के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है।

ऐसे में 16 मई को व्रत रखने, शनि मंदिर में सरसों का तेल, काला तिल, लोहे की वस्तुएं दान करने और पीपल के वृक्ष की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होगी।

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