🚨 यमुना की चीत्कार बनी राष्ट्रीय दहाड़!
500 किमी पैदल चलकर आईं जल सहेलियाँ… UP मंत्री सम्मानित करने पहुँचे, दिल्ली सरकार का एक भी नेता नदारद!
यमुना पुत्र रंजीत महेश पाठक गरजे – “माताएँ सड़क पर आ गईं तो समाज फेल, अब लापरवाही की सजा कड़ी होगी!”
रिपोर्ट:- आकाश चतुर्वेदी बैंकर समाचार सुपरफास्ट
दिल्ली, 26 फरवरी 2026 |
वासुदेव घाट (कश्मीरी गेट)
आज यमुना माँ ने पूरे देश को आईना दिखा दिया।
उत्तर प्रदेश के पचनदा से दिल्ली तक 500 किलोमीटर की यमुना पदयात्रा कर हजारों जल सहेलियाँ (माताएँ-बहनें-बेटियाँ) आज वासुदेव घाट पर पहुँचीं। पैरों में छाले, आँखों में आग, और दिल में सिर्फ एक पुकार – “यमुना माँ को बचाओ!”
जब ये जल सहेलियाँ घाट पर पहुँचीं, तो यमुना पुत्र रंजीत महेश पाठक (मथुरा वाले) की आवाज़ आसमान फाड़ गई:
“जब घर की बहन-बेटी-माताएँ सड़क पर उतर आती हैं, तो ये समाज के लिए सबसे बड़ी शर्म और दुख की बात है। ये समाज की, देश की और पूरे राष्ट्र की सबसे बड़ी नाकामी है!”
उनकी आँखें लाल, स्वर में गरज:
“इन माताओं-बहनों के सम्मान में अगर यमुना जी की सफाई में कोई लापरवाही हुई, तो कड़ी से कड़ी कार्यवाही होगी। यमुना पुत्र की मेहनत व्यर्थ नहीं जाएगी।
यमुना भक्त उग्र भी हो सकता है! कोई यमुना पुत्र को कमजोर न समझे। जब एक यमुना पुत्र ऐसे बोल सकता है, तो हम सब मिलकर दहाड़ लगाएंगे… और हमारी गूंज दिल्ली से लेकर देश-विदेश तक जाएगी!”
विशेष खुलासा
उत्तर प्रदेश के जल मंत्री स्वतंत्र देव सिंह जल सहेलियों को सम्मानित करने विशेष रूप से दिल्ली पहुँचे।
लेकिन… दिल्ली सरकार का कोई भी मंत्री या नेता नहीं आया। न पानी मंत्री, न पर्यावरण मंत्री, न मुख्यमंत्री का कोई प्रतिनिधि।
ये चुप्पी यमुना के घाव पर नमक छिड़क रही है!
यमुना नदी – जो कभी राष्ट्रीय राजधानी की जीवनरेखा थी – देश के किसी भी चुनाव के लिए मतदान से कुछ दिन पहले राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग का केंद्र बनी रहती है लेकिन चुनाव जीतने के बाद नेता यमुना को भूल जाते हैं
यमुना नदी के बढ़ते प्रदूषण ने दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में भी इस मुद्दे को केंद्र में ला दिया था.
प्रदूषण से अस्तित्व खोती यमुना क्या निर्मल हो पाएगी ?
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