हेडलाइन: लखनऊ अग्निकांड के बाद मथुरा में अलर्ट: ‘आकाश’ कोचिंग में फायर NOC और मानचित्र के नियमों की उड़ी धज्जियां, MVDA-फायर विभाग मौन
मथुरा। (समाचार सुपरफास्ट) लखनऊ में कोचिंग संस्थान में हुए भीषण अग्निकांड में बच्चों की दर्दनाक मौत के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अलीगढ़ दौरा बीच में छोड़कर लखनऊ रवाना होते हुए कहा कि “दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा”। CM के इस सख्त रुख के बाद मथुरा में भी कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं।
मामला मथुरा की ‘आकाश’ कोचिंग का
शहर के पॉश इलाके में स्थित ‘आकाश इंस्टीट्यूट’ की मथुरा ब्रांच में सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी के आरोप लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि तीन मंजिला इस बिल्डिंग में सैकड़ों बच्चे NEET-JEE की तैयारी करते हैं, लेकिन यहां बुनियादी सुरक्षा इंतजाम नदारद हैं।
- फायर विभाग की NOC पर सवाल
नियमानुसार 9 मीटर से ऊंची या 500 वर्गमीटर से बड़े शैक्षणिक भवन में फायर NOC अनिवार्य है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बिल्डिंग में एक ही संकरी सीढ़ी है जो इमरजेंसी में भगदड़ का कारण बन सकती है। इमारत में फायर एग्जिट, स्प्रिंकलर सिस्टम और फायर अलार्म दिखाई नहीं दे रहे। सवाल यह है कि बिना फायर NOC के कोचिंग कैसे चल रही है? मुख्य अग्निशमन अधिकारी मथुरा इस पर चुप्पी साधे हैं। - MVDA के मानचित्र नियमों का उल्लंघन?
मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के नियमों के तहत शैक्षणिक भवन के लिए पार्किंग, सेटबैक और खुला क्षेत्र छोड़ना जरूरी है। फोटो में दिख रही बिल्डिंग कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स में चल रही है जहां HDFC Life और Dr Lal PathLabs भी हैं। आरोप है कि मानचित्र में बिल्डिंग का भू-उपयोग ‘कॉमर्शियल’ पास है कि नहीं, जबकि कोचिंग ‘शैक्षणिक’ गतिविधि है। MVDA ने मानचित्र में बदलाव की अनुमति दी या नहीं, इसका जवाब किसी अधिकारी के पास नहीं है। - लखनऊ हादसे से सबक नहीं
मुख्यमंत्री ने लखनऊ हादसे के बाद DGP और अपर मुख्य सचिव गृह को मौके पर भेजकर रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने कहा कि “पूरे मामले की तह में जाकर दोषियों को सजा देंगे”। मथुरा में भी अभिभावकों ने मांग की है कि जिला प्रशासन तुरंत सभी कोचिंग सेंटरों का फायर ऑडिट कराए।
अधिकारियों का पक्ष
इस संबंध में जब CFO मथुरा से बात करने की कोशिश की गई तो संपर्क नहीं हो सका।
क्या कहता है नियम
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की गाइडलाइन के अनुसार कोचिंग संस्थानों में दो निकास द्वार, फायर एक्सटिंग्विशर, इमरजेंसी लाइटिंग और सालाना फायर ऑडिट अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट भी कई बार कह चुका है कि बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं हो सकता।
रिपोर्ट:-आकाश चतुर्वेदी बैंकर
सी.ई.ओ & एडिटर इन चीफ
(समाचार सुपरफास्ट)
(उत्तर-प्रदेश/उत्तराखंड)
